Breakup Shayari

Sad Shayari Girls || Sad Shayari Girls in Hindi

Sad Shayari Girls
Written by admin

Sad Shayari Girls || Sad Shayari Girls in Hindi दोस्तों  वास्तव में, डिप्रेशन जबरदस्त रूप से अलग हो सकता है। डिप्रेसिंग कोट्स और बातें ठीक-ठीक इस बात की समझ प्रदान करती हैं कि यह वास्तव में अवसाद का सामना करना पसंद करती है, और प्रेरणा, साथ ही साथ “किसी को भी, यह समझ में आता है।” इनमें से प्रत्येक एक बीमारी के कई तत्वों के साथ मदद करता है जिसमें दुःख, शोक, अकेलापन और साथ ही अन्य संबंधित मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

यह सिर्फ इसलिए हो सकता है क्योंकि आपके दिल टूटे हुए हैं। अवसाद एक मनोदशा की स्थिति है और गतिविधि के प्रति घृणा है जो एक व्यक्ति को अपराध, व्यर्थता, असहायता, या निराशा की भावनाओं को बढ़ा सकती है। यह एक व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, भावनाओं और कल्याण की स्थिति को प्रभावित करता है।

कई अवसादग्रस्त लोग दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में रुचि खो देते हैं और अनिद्रा, थकान, दर्द, दर्द, पाचन समस्याओं, भूख न लगना या अधिक खाने, ध्यान केंद्रित करने या कम ऊर्जा जैसे विभिन्न असुविधाजनक लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। नीचे निराशाजनक उदास उद्धरणों का एक शानदार संग्रह है जो आपको एहसास दिलाएगा कि यह केवल आप ही नहीं हैं जो उसी तरह महसूस करते हैं, हर कोई करता है। यही कारण है कि आपके आस-पास सबसे अच्छे दोस्त होना जरूरी है।

यह आपके लिए बहुत अधिक उदास और नीचे महसूस करने के लिए नहीं है, लेकिन आपको यह महसूस करने के लिए कि दर्द जीवन की वास्तविकता है और हर कोई इसका सामना करता है। उम्मीद है, लव और लाइफ के बारे में ये डिप्रेसिंग कोट्स आपको जरूरत पड़ने पर आपको प्रतिबिंबित और खुश करने में मदद करेंगे। थोड़ा हंसने के लिए मज़ेदार उद्धरणों की इस अंतिम सूची को ज़रूर देखें।

यह मत भूलो कि बारिश के बाद धूप आती ​​है! हर सुबह एक बड़ी मुस्कान के साथ जागने के लिए हमारी गुड मॉर्निंग कोट्स पढ़ें और कठिन समय में आपकी मदद करें। उसे दिल से एक रोमांटिक प्रेम उद्धरण भेजें, और शायद वह आपको खुश करने में मदद कर सके। या अपनी माँ को एक प्यारी माँ-बेटी बोली। आपके जीवन में हमेशा लोग हैं जो आपके लिए होंगे, कभी-कभी आपको केवल संवाद करना होगा!

 

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जिसके नसीब मे हों ज़माने की ठोकरें,
उस बदनसीब से ना सहारों की बात कर।

 

बुला रहा है कौन मुझको उस तरफ,
मेरे लिए भी क्या कोई उदास बेक़रार है।

 

वो तेरे खत तेरी तस्वीर और सूखे फूल,
उदास करती हैं मुझ को निशानियाँ तेरी।

 

वह मेरा सब कुछ है पर मुक़द्दर नहीं,
काश वो मेरा कुछ न होता पर मुक़द्दर होता।

 

दिल को बुझाने का बहाना कोई दरकार तो था,
दुःख तो ये है तेरे दामन ने हवायें दी हैं।

 

मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,
हैं मौसम की तरह लोग… बदल जाते हैं,
हम अभी तक हैं गिरफ्तार-ए-मोहब्बत यारों,
ठोकरें खा के सुना था कि संभल जाते हैं।

 

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी,
फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी।

 

देखी है बेरुखी की आज हम ने इन्तेहाँ,
हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए।

 

एक नजर भी देखना गंवारा नहीं उसे,
जरा सा भी एहसास हमारा नहीं उसे,
वो साहिल से देखते रहे डूबना हमारा,
हम भी खुद्दार थे पुकारा नहीं उसे।

 

काश वो समझते इस दिल की तड़प को,
तो हमें यूँ रुसवा न किया जाता,
यह बेरुखी भी उनकी मंज़ूर थी हमें,
बस एक बार हमें समझ तो लिया होता।

 

वह मेरा सब कुछ है पर मुक़द्दर नहीं,
काश वो मेरा कुछ न होता पर मुक़द्दर होता।

 

अपना लडना भी मोहब्बत है तुझे एल्म नही
चिल्लाती तुम रहे और मेरा गला बैठ गया..

 

ना जाने किस बात पे वो नाराज हैं हमसे,
ख्वाबों मे भी मिलता हूँ तो बात नही करती।

 

उजड़ जाते हैं सर से पाँव तक वो लोग जो,
किसी बेपरवाह से बे-पनाह मोहब्बत करते हैं।

 

उदास हूँ किसी की बेवफाई पर
वफाकही तो कर गए हो खुश रहो

 

सुनो कोई टूट रहा है तुम्हे एहसास दिलाते दिलाते,
सीख भी जाओ किसी की चाहत की कदर करना।

 

दिल को बुझाने का बहाना कोई दरकार तो था,
दुःख तो ये है तेरे दामन ने हवायें दी हैं।

 

तुम तो डर गये हमारी एक ही कसम से,
हमे तो तुम्हारी कसम देकर हजारो ने लूटा है।

 

अगर नींद आ जाये तो, सो भी लिया करो,
रातों को जागने से, मोहब्बत लौटा नहीं करती।

 

जब कभी फुर्सत मिले मेरे दिल का बोझ उतार दो,
मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे कोई शाम उधार दो।

 

हमने तुम्हें उस दिन से और भी ज़्यादा चाहा है,
जबसे मालूम हुआ तुम हमारे होना नही चाहते।

 

तुम्हारे बाद न तकमील हो सकी अपनी,
तुम्हारे बाद अधूरे तमाम ख्वाब लगे।

 

यकीन था कि तुम भूल जाओगे मुझको,
खुशी है कि तुम उम्मीद पर खरे उतरे।

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अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तेहा,
तो हम तुमसे नहीं, तुम हमसे मोहब्बत करते।

 

कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर,
एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था…

 

रहता तो नशा तेरी यादों का ही है,
कोई पूछे तो कह देता हूँ पी राखी है।

 

मत पूछ मुझे………, क्या गम है!
तेरे वादे पे ज़िंदा हूँ, क्या कम है!!

 

वो सोचती होगी बड़े चैन से सो रहा हूँ मैं,
उसे क्या पता ओढ़ के चादर रो रहा हूँ मैं।

 

मुझे जिस चिराग से प्यार था…
मेरा सब कुछ उसी ने जला दिया…

 

निकाल दिया उसने हमें अपनी जिंदगी से, भीगे कागज़ की तरह,
न लिखने के काबिल छोड़ा न जलने के।

 

हम तो नरम पत्तों की शाख़ हुआ करते थे,
छीले इतने गए कि “खंज़र ” हो गए…

 

वजह तक पूछने का मौका ही ना मिला,
बस लम्हे गुजरते गए और हम अजनबी होते गए।

 

निकले हम दुनिया की भीड़ में तो पता चला की…
हर वह शख्स अकेला है, जिसने मोहब्बत की है!

 

अब मोहब्बत नहीं रही इस जमाने में,
क्योंकि लोग अब मोहब्बत नहीं मज़ाक किया करते है।

 

पलकों की हद तोड़ के, दामन पे आ गिरा,
एक आसूं मेरे सब्र की, तोहीन कर गया।

 

अच्छा है आँसुओं का रंग नहीं होता,
वरना सुबह के तकिये रात का हाल बयां कर देते।

 

टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्र भर,
चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में!!

 

टूट कर चाहना और फिर टूट जाना,
बात छोटी है मगर जान निकल जाती है।

 

हर दर्द का इलाज़ मिलता था जिस बाज़ार में,
मोहब्बत का नाम लिया तो दवाख़ाने बन्द हो गये!!

 

अभी एक टूटा तारा देखा, बिलकुल मेरे जैसा था,
चाँद को कोई फर्क न पड़ा, बिलकुल तेरे जैसा था।

 

छोड़कर अपनी यादों की निशानियां मेरे दिल में,
वो भी चले गये वक्त की तरह।

 

सजा ये है की बंजर जमीन हूँ मैं,
और जुल्म ये है की बारिशों से इश्क़ हो गया।

 

तरस आता है मुझे अपनी, मासूम सी पलकों पर,
जब भीग कर कहती हैं कि अब, रोया नहीं जाता।

 

फ़रियाद कर रही है तरसी हुई निगाहें,
किसी को देखे एक अरसा हो गया।

 

न ज़ख्म भरे, न शराब सहारा हुई,
न वो वापस लोटी, न मोहब्बत दोबारा हुई..

 

हमें देख कर जब उसने मुँह मोड़ लिया,
एक तसल्ली हो गयी चलो पहचानते तो हैं।

 

मैं तो रह लूंगा तुझसे बिछड़ कर तन्हा भी,
बस दिल का सोचता हूँ, कहीं धडकना न छोड़ दे!!

 

सिर्फ हम ही है तेरे दिल में,
बस यही गलतफहमी हमें बर्बाद कर गई।

 

छोड़ दिया हमने तेरे ख्यालों में जीना,
अब हम लोगों से नहीं, लोग हमसे मोहब्बत करते है।

 

मोहब्बत नही तो मुकदमा हि दायर कर दे जालिम,
तारीख दर तारीख तेरा दीदार तो होगा।

 

मुस्कुराने की आदत भी कितनी महँगी पड़ी हमे,
छोड़ गया वो ये सोच कर की हम जुदाई मे भी खुश हैं!!

 

दुआ करना दम भी उसी तरह निकले,
जिस तरह तेरे दिल से हम निकले।

 

तलब ऐसी कि अपनी सांसों में समा लू तुझे,
किस्मत ऐसी कि देखने को भी मोहताज हूँ तुझे!!

 

दर्द मुझको ढूंढ लेता है, रोज नए बहाने से,
वो हो गया वाकिफ़, मेरे हर ठिकाने से।

 

रहेगा किस्मत से यही गिला ज़िंदगी भर,
जिसको पल-पल चाहा उसी को पल-पल तरसे!!

 

कत्ल हुआ हमारा इस तरह किस्तों में,
कभी खंजर बदल गए, कभी कातिल बदल गए।

 

कल रात का आलम इस कदर था यारो,
उसकी यादों ने मेरी आँखो को सोने ना दिया!!

 

रात तकती रही आँखो में, दिल आरजू करता रहा,
कोई बे-सबर रोता रहा, कोई बे-खबर सोता रहा..!!

 

बहुत मासूम होते है ये आँसू भी,
ये गिरते उनके लिए है, जिन्हें परवाह नहीं होती।

 

खता उनकी भी नहीं है वो क्या करते,
हजारों चाहने वाले थे किस-किस से वफ़ा करते।

 

चले जायेंगे एक दिन, तुझे तेरे हाल पर छोड़कर…
कदर क्या होती हैं प्यार की, तुझे वक़्त ही सीखा देगा…

 

माफ़ी चाहता हूँ गुनेहगार हूँ तेरा ऐ दिल,
तुझे उसके हवाले किया जिसे तेरी कदर नहीं।

 

न जाने कौन सी साजिशों के हम शिकार हुए,
जितना साफ दिल रखा उतने ही हम दागदार हुए।

 

शायरी के लिए कुछ ख़ास नहीं चाहिए,
एक यार चाहिए और वो भी दगाबाज चाहिए।

 

लगता है मैं भूल चुका हूँ, मुस्कुराने का हुनर,
कोशिश जब भी करता हूँ, आँसू निकल आते हैं..!

 

शीशे में डूब कर, पीते रहे उस “जाम” को,
कोशिशें तो बहुत की मगर, भुला ना पाए एक “नाम” को।

 

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ख्वाहिश तो न थी किसी से दिल लगाने की,
पर किस्मत में दर्द लिखा हो तो मुहब्बत कैसे ना होती।

 

किस्मत की किताब तो खूब लिखी थी मेरी खुदा ने,
बस वही पन्ना गुम था जिसमें मुहब्बत का जिक्र था।

 

लगा कर आग सीने में, चले हो तुम कहाँ,
अभी तो राख उड़ने दो, तमाशा और भी होगा।

 

अपना बनाकर फिर कुछ दिनों में बेगाना बना दिया,
भर गया दिल हमसे और मजबूरी का बहाना बना दिया।

 

आदत बदल सी गई है वक्त काटने की,
हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।

 

तन्हाई की चादर ओढ़कर रातों को नींद नहीं आती हमें,
गुजर जाती है हर रात किसी की बातों को याद करते करते।

 

मैं अक्सर रात में यूं ही सड़क पर निकल आता हूँ,
यह सोचकर की कहीं ,चाँद को तन्हाई का अहसास न हो।

 

हमने उतार दिए सारे कर्ज तेरी मुहब्बत के,
अब हिसाब होगा तो सिर्फ तेरे दिए हुए जख्मों का।

 

लिखी है खुदा ने मोहब्बत सबकी तक़दीर में,
हमारी बारी आई तो स्याही ही ख़त्म हो गई!!

 

बिखरती रही जिंदगी बूँद-दर-बूँद,
मगर इश्क़ फिर भी प्यासा रहा।

 

जुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आजमाये गये,
जुल्म भी सहा हमने, और जालिम भी कहलाये गये!!

 

सुना था मोहब्बत मिलती है, मोहब्बत के बदले,
हमारी बारी आई तो, रिवाज ही बदल गया।

 

दुनिया फ़रेब करके हुनरमंद हो गई…
हम ऐतबार करके गुनाहगार हो गए…

 

कैसे दूर करूँ ये उदासी, बता दे कोई,
लगा के सीने से काश, रुला दे कोई।

 

शुक्र करो कि हम दर्द सहते हैं, लिखते नहीं।
वरना कागजों पर लफ़्ज़ों के जनाज़े उठते।

 

माना मौसम भी बदलते है मगर धीरे-धीरे,
तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है।

 

ज़िन्दगी की हर शाम, हसीन हो जाए…
अगर मेरी मोहब्बत मुझे, नसीब हो जाये…

 

लम्हा दर लम्हा साथ, उम्र बीत ज़ाने तक,
मोहब्बत वहीं हैं ज़ो चले, मौत आने तक…

 

भीगी नहीं थी मेरी आँखें कभी, वक़्त की मार से…
देख तेरी थोड़ी सी बेरुखी ने इन्हें, जी भर के रुला दिया…

 

मेरी आँखो का हर आँसू, तेरे प्यार की निशानी है,
जो तू समझे तो मोती है, ना समझे तो पानी है…

 

इन्हीं रास्तों ने जिन पर मेरे साथ, तुम चले थे…
मुझे रोक के पूछा की तेरा, हमसफ़र कहाँ है…

 

खैर कुछ तो किया उसने…
चलो तबाह ही सही…!

 

जागना कबूल हैं तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में अब कहाँ!!

 

आखिर क्यों बस जाते हैं दिल में, बिना इजाज़त लिए वो लोग,
जिन्हे हम ज़िन्दगी में कभी पा, नहीं सकते।

 

मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती,
पाला है बड़े नाज़ से… मेरे गमों ने मुझे!

 

खुदखुशी करने से मुझे कोई परहेज नही है,
बस शर्त इतनी है कि फंदा तेरी जुल्फों का हो!!

 

मैंने दरवाज़े पे ताला भी लगा कर देखा लिया,
पर ग़म फिर भी समझ जाते है की मैं घर में हूँ!!

 

मुझे नींद की इजाज़त भी उनकी यादों से लेनी पड़ती है,
जो खुद आराम से सोये हैं, मुझे करवटों में छोड़ कर।

 

भला कौन इस दिल की इतनी, देख-भाल करे…
रोज़-रोज़ तो इसकी किस्मत में, टूटना ही लिखा है…

 

मैने माँगा था थोड़ा सा उजाला अपनी जिंदगी में,
चाहने वालों ने तो आग ही लगा दी।

 

उदास कर देती है हर रोज ये बात मुझे,
ऐसा लगता है भूल रहा है कोई मुझे धीरे-धीरे…

 

समझदार ही करते है अक्सर गलतिया,
कभी देखा है, किसी पागल को मोहब्बत करते।

 

मौहब्बत की मिसाल में बस इतना ही कहूँगा…
बेमिसाल सज़ा है, किसी बेगुनाह के लिए!!

 

हमे क्या पता था, आसमान इस कदर रो पडेगा,
हमने तो बस उसे अपनी दास्तां सुनाई थी!!

 

याद में नशा करता हूँ…
और नशे में याद करता हूँ…

 

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