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Sher O Shayari Urdu || Sher O Shayari Urdu and Hindi

sher o shayari urdu
Written by admin

sher o shayari urdu || sher o shayari urdu 2020 दोस्तों आज हम आप सभी के लिए latest sher o shayari urdu में लेकर आये हैं  दोस्तों ये sher o shayari का दौर बहुत अर्शे से चला आ रहा हैं और आज भी चल रहा हैं पहेले लोग अपनी प्यार का इज़हार इन्ही sher o shayari को कागज़ पर लिख कर करते थे और आज के समय में हम सभी लोग इसका उपयोग whatsapp facebook और instagram पर करते हैं

दोस्तों आज भी हम सभी लोग प्यार का इज़हार इन्ही sher o shayari  ही करते हैं  जैसे की पुराने दौर में चलता था लेकिन आज के समय में हम इन शायरियो के प्रयोग हर समय करते हैं खुशियों  हो चाहे गम, इसलिए आज हम अप सभी के लिए कुछ ऐसी ही sher o shayari urdu ले कर आ गये हैं जोकि आपको अपने पुराने समय को याद करने में बहुत मदद करेगा और उन लम्हों को याद कराएगा जिसको आप भूल चुके हैं |

sher o shayari urdu

 

अजब चराग़ हूँ दिन रात जलता रहता हूँ
मैं थक गया हूँ हवा से कहो बुझाए मुझे
– बशीर बद्र
میں عجیب سا چراغ ہوں ، دن رات جلتا رہتا ہوں
میں ہوا سے تھک گیا ہوں مجھے بجھانے کو کہو
– بشیر بدر

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं
– जिगर मुरादाबादी
میرے دل میں کسی کی رہنمائی ہو رہی ہے
میں کتنا ہنس رہا ہوں؟
– جگر مرادآبادی

आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
– वसीम बरेलवी
عاصمہ اتنی اونچی ہے کہ ڈگمگاتی ہے
صرف زمین سے بھول جاتا ہے
– وسیم بریلوی

बक रहा हूँ जुनूँ में क्या क्या कुछ
कुछ न समझे ख़ुदा करे कोई
– मिर्ज़ा ग़ालिब
جونون میں کیا کر رہا ہوں
خدا کچھ بھی نہیں سمجھتا
– مرزا غالب

हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गए
दिल की बाज़ी लगा के हार गए
– दाग़ देहलवी
ہم بھی کیا گئے ہیں
میرا دل کھو گیا
– داغ دہلوی

इस रास्ते के नाम लिखो एक शाम और
या इस में रौशनी का करो इंतिज़ाम और
– दुष्यंत कुमार
اس سڑک کا نام ایک شام اور لکھیں
یا اس انتظام میں لائٹنگ کریں اور
– دشیانت کمار

मेरे रोने की हक़ीक़त जिसमें थी
एक मुद्दत तक वो काग़ज़ नम रहा
– मीर
میرے رونے کی حقیقت
وہ کاغذ ایک وقت کے لئے نم تھا
– میر

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे
मैं तुझे भूल के ज़िंदा रहूं ख़ुदा न करे
– क़तील शिफ़ाई
وہ کونسا دل ہے جو آپ کے لئے دعا نہیں کرتا ہے؟
میں آپ کو بھول جاتا ہوں اور جیتا ہوں میں نہیں جیتا
– قاتل شفائی

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते
– गुलज़ार
یہاں تک کہ اگر وہ ہاتھ چھوڑ دیتے ہیں تو ، وہ رشتہ نہیں چھوڑتے ہیں
لمحات وقت نہیں توڑتے ہیں
– گلزار

कुछ फैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए
पानी को अब तो सर से गुज़र जाना चाहिए
– परवीन शाकिर
کہاں جانا ہے وہاں کچھ فیصلہ کرنا ہوگا
پانی اب سر سے گزرنا چاہئے

आज देखा है तुझ को देर के बाद
आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
– नासिर काज़मी
– پروین شاکر
آج نے آپ کو تھوڑی دیر بعد دیکھا ہے
آج کا دن نہیں گزر سکتا
– ناصر کاظمی

आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो
नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है
– जाँ निसार अख़्तर
اگر آپ آنکھیں اٹھا لیں تو آپ محبت کا چہرہ ہیں
اگر آپ اپنی آنکھوں کو دیکھیں تو آپ شکایت کر رہے ہیں
– جان نثار اختر

आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर
– मख़दूम मुहिउद्दीन
آپ کو ساری رات یاد آرہا ہے
رات بھر چشم-نام مسکراتا رہا
– مخدوم محی الدین

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
– फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
دنیا میں پیار کے علاوہ اور بھی غم ہیں
واصل کی راحت کے سوا اور بھی راحتیں ہیں
– فیض احمد فیض

दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए
ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
– कलीम आजिज़
تکلیف ایسی ہے جو اسے زندہ رہتی ہے
زندگی مرنا چاہتی ہے
– کلیم عزیز

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से
चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से
– साहिर लुधियानवी
زندگی کو بہت قریب دیکھا ہے
چہرے عجیب لگنے لگے ہیں
– ساحر لدھیانوی

चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल
हौसला किस का बढ़ाता है कोई
– शकील बदायुनी
خود پر یقین کرنا چاہتے ہیں
جو کسی کو ترقی دیتا ہے
– شکیل بڈونی

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
– निदा फ़ाज़ली
دھوپ میں نکلیں اور نہائیں
زندگی کیا ہے کتابوں کو دیکھو
– ندا فضلی

 

sher o shayari urdu 2020

करते हैं सिज्दे इसलिए दैरो-हरम में हम,
क्या जानिए वह शोख कहाँ हो कहाँ न हो।
-तसलीम
ہم ایسا کرتے ہیں تاکہ ہم ڈیرہ حرام میں
کیا آپ جانتے ہیں کہ وہ شان کہاں ہے یا نہیں؟
-سلیم

करने का नहीं कद्र कोई इससे जियादा,
रखता हूँ कलेजे में तेरे तीरे-नजर को।
-बिस्मिल
کوئی بھی اس سے زیادہ کرنا پسند نہیں کرتا ،
میں تیری نگاہ کو دل میں رکھتا ہوں۔
-بسمائل

करूँ तो किससे करूँ दर्दे-इश्क का शिकवा,
कि यारों जिन्दगी को इस दर्द ने संवारा है।
اگر میں کروں تو ، محبت کس سے کروں؟
کہ میرے دوستوں نے اس درد کی تائید کی ہے۔

करूँ मैं दुश्मनी किससे कोई दुश्मन भी हो अपना,
मुहब्ब्त ने नहीं दिल में जगह छोड़ी अदावत की।
کیا مجھے دشمنی ہو جس سے میرا دشمن ہے ،
محببت نے اپنے دل میں جگہ نہیں چھوڑی۔

अजाबे-जां है खुदा जाने क्यों यह आजादी,
सुकून था जो कफस में वह आशियां में नहीं।
-‘दिल’ शाहजहाँपुरी
خدا جانتا ہے کہ یہ آزادی کیوں ہے ،
یہ اس اعتبار سے یقین دہانی کر رہا تھا کہ اسے پیار نہیں تھا۔
-دل ‘شاہجہاں پوری

अदा निगाहों से होता है फर्जे-गोयाई,
जुबां की हद से जब शौके-बयां गुजरता है।
-निहाल सेहरारवी
فراجے گوئی پوری آنکھوں سے کیا جاتا ہے
جب جوبن کی حد گزر جاتی ہے۔
-نہال سہرراوی

अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है,
कौन कहता है कि सादिक न थे जज्बे उनके,
लेकिन उनके लिए तश्हीर का सामान नहीं,
क्योंकि ये लोग भी अपनी तरह मुफलिस थे।
-साहिर लुधियानवी
دنیا میں لاتعداد افراد نے پیار کیا ہے ،
کون کہتا ہے کہ صادق کو ان کا شوق نہیں تھا ،
لیکن تاشیر جیسے ان کے ل، ،
کیونکہ یہ لوگ بھی مفلس جیسے تھے۔
-سہیر لدھیانوی

‘अनीस’ आसाँ नहीं आबाद करना घर मुहब्बत का,
यह उनका काम है जो जिन्दगी बरबाद करते हैं।
-मीर अनीस
‘انیس’ محبت میں بسنے کے لئے آسان نہیں ہے ،
یہ اس کا کام ہے جو زندگی کو برباد کر دیتا ہے۔
میر انیس

अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।
-जलील मानिकपुरी
اب مجھے ایک کاروان تلاش کرنے کے لئے کیا کرنا چاہئے ،
میں تمہارے ساتھ تمہارا سکون کھو بیٹھا ہوں۔
-جلیل مانک پوری

अब जाके आरजू का मुकम्मल हुआ है नक्श,
सब मानने लगे हैं कि मैं दीवाना हो गया।
-मुनव्वर लखनवी
اب ارجو نے نقشہ مکمل کرلیا ہے ،
ہر ایک نے یقین کرنا شروع کردیا ہے کہ میں پاگل ہوگیا ہوں۔
-منور لکھنؤ

अब तक न खबर थी, मुझे उजड़े हुए घर की,
तुम आए तो घर बेसरोसामां नजर आया।
ابھی تک کوئی خبر نہیں تھی ، میں برباد ہوگیا تھا ،
جب آپ تشریف لائے تو مکان بیسروسا کی طرح نظر آیا۔

अब बुझा दो ये सिसकते हुए यादों के चराग,
इनसे कब हिज्र की रातों में उजाला होगा।
-खलीलुर्रहमान आजमी
اب ان چمکتی ہوئی یادوں کو بجھو ،
ہجری راتوں میں وہ کب روشن ہوں گے؟
-خلیل الرحمن اعظمی

आधी से जियादा शबे-गम काट चुके हैं,
अब भी आ जाओ तो यह रात बड़ी है।
-साकिब लखनवी
انہوں نے آدھا مسو کاٹا ہے ،
اب بھی ، یہ رات بڑی ہے۔
-صاقب لکھنوی

आने दो इल्तिफात में कुछ और भी कमी,
मानूस हो रहे हैं तुम्हारी जफा से हम।
-अर्श मल्सियानी
الفت میں کچھ اور کوتاہیاں ہونے دیں ،
مجھے آپ کے لئے افسوس ہے۔
-آرشا ملسیانی

आने में सदा देर लगाते ही रहे तुम,
जाते रहे हम जान से आते ही रहे तुम।
-रासिख अजीमाबादी
آپ ہمیشہ دیر سے آتے رہے ،
ہم زندگی سے آتے رہے۔
-راشیخ عظیم آبادی

आप पछताएं नहीं जौर से तौबा न करें,
आप के सर की कसम ‘दाग’ का हाल अच्छा है।
-मिर्जा दाग
آپ کو افسوس نہیں ، اپنا دماغ نہیں کھونا ،
میں آپ کے سر کی قسم کھاتا ہوں کہ ‘داگ’ کی حالت اچھی ہے۔
– مرزا داغ

आप हो, मय हो, खल्वत हो,
दिन ये किसको नसीब होते हैं
-माइल देहलवी
آپ مایا ہیں ، آپ خلوت ہیں ،
جن کے دن مقدر ہیں
-مہل دہلوی

आप की खातिर से हम करते है जब्ते-इज्तिराब,
देखकर बेताब मुझको और घबराते हैं आप।
-बहादुरशाह जफर
آپ کی خاطر ہم جبت اجتیرب کرتے ہیں ،
آپ کو دیکھ کر اور مجھے بے چین کردیا ، آپ گھبرائیں۔
-بہادر شاہ ظفر

आप के पास जमाना नहीं रहने देगा,
आप से दूर मुहब्बत नहीं रहने देंगी।
آپ کو منجمد نہیں ہونے دیں گے ،
محبت آپ سے دور نہیں ہونے دے گی۔

आप जिस वक्त दिल में होते हैं,
दिल की दुनिया जमील होती है।
-प्रकाशनाथ परवेज
جب بھی آپ اپنے دل میں ہوں ،
دل کی دنیا گراؤنڈ ہے۔
-پریکاش ناتھ پرویز

आम है यूँ तो मेरी बर्बादियों का वाकेआ,
वह तो कह दें कि कोई मर मिटा मेरे लिये।
-उम्मीद लखनवी
یہ عام ہے کہ میرا فضلہ ہے
انہیں یہ کہنا چاہئے کہ میرے لئے کوئی مرتا ہے۔
امید لکھنوی

आया ही था खयाल कि आंखें छलक पड़ीं,
आंसू किसी की याद के कितने करीब हैं।
-अंजुम
خیال آیا تھا کہ آنکھیں چھلک پڑ گئیں ،
کسی کی یاد کے آنسو کتنے قریب ہیں۔
-انجم

आये तो यूँ कि जैसे हमेशा थे मेहरबाँ,
भूले तो यूँ कि जैसे कभी आश्ना न थे।
-फैज अहमद फैज
بالکل ایسے ہی جیسے ،
اسے بھول جیسا کہ کبھی یقین دہانی نہیں ہوئی تھی۔
-فاز احمد فیض

आये हो कल और आज ही कहते हो कि जाऊं,
माना कि हमेशा नहीं अच्छा, कोई दिन और।
जाते हुए कहते हो कयामत को मिलेंगे,
क्या खूब कयामत का है गोया कोई दिन और।
-मिर्जा गालिब
تم کل آئے ہو اور آج تم کہتے ہو کہ مجھے جانا چاہئے ،
عطا کیا ، ہمیشہ اچھا نہیں ، کسی دوسرے دن۔
جاکر ، آپ کہتے ہیں کہ آپ کو عذاب مل جائے گا ،
کتنا بڑا عذاب ، کسی اور دن۔
-مرجا غالب

 

sher o shayari urdu

 

जब तक मिले न थे जुदाई का था मलाल,
अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई।
-अब्राहम ज़ौक़
جب تک میری ملاقات ہوئی اس وقت تک میں علیحدگی کا حصہ تھا ،
اب پچھتاوا ہوا ہے کہ تمنا چلا گیا ہے۔
-ابراہم ذوق

जब पुरसिशे-हाल वह करते हैं, क्या जानिए क्या हो जाता है,
कुछ यूं ही जुबान नहीं खुलती, कुछ दर्द सिवा हो जाता हैं।
-फ़ानी बदायुनी
جب کاہن ایسا کرتے ہیں تو ، جانتے ہیں کہ کیا ہوتا ہے ،
کچھ الفاظ اس طرح نہیں کھلتے ، کچھ درد ہوتا ہے۔
-فانی بد Bونی

जब वह नजरों से दूर होते हैं,
फिर कहीं रौशनी नहीं होती।
-साजन पेशावरी
جب وہ نظروں سے ہٹ جاتے ہیں ،
پھر کہیں بھی روشنی نہیں ہے۔
-سجن پیشواری

जब वह मेरे करीब होते हैं खाक जलकर रकीब होते हैं,
रश्क आता है उस मुकद्दर आप जिसके हबीब होते हैं।
-माइल देहलवी
جب وہ میرے قریب ہوں گے ، آگ جل رہی ہے ،
راشک آتا ہے ، جس کی قسمت تم حبیب ہو۔
-مہل دہلوی

जब सब्र आ गया तो मुहब्बत कहाँ रही,
मुज्तर दिलों में काम ही क्या है करार का।
جب صبر آیا تو محبت کہاں تھی ،
مظاہر دلوں میں معاہدے کا کیا کام؟

जबीने-सिज्दा में कौनेन की वुसअत समा जाए,
अगर आजाद हो कैदे-खुदी से बंदगी अपनी।
-‘असर’ लखनवी
جبین-سجدہ میں کونن کی وسعت ،
اگر آپ آزاد ہیں تو آپ کو زندگی سے نظربند کردیا جائے گا۔
-‘اصار ‘لکھنؤی

जरा देख परवाने करवट बदलकर,
सती हो गई शम्अ महफिल में जलकर।
-साकिब लखनवी
بس پین میں ہونے والی تبدیلی کو دیکھیں ،
ستی مہافل میں جل گئ۔
-صاقب لکھنوی

जल भी जा बदनसीब परवाने,
शम्अ की जिन्दगी दराज नहीं।
-अब्दुल हमीद अदम
پانی بھی بد قسمت ہوسکتا ہے
ماں کی زندگی دراز نہیں ہوتی۔
-عدل حمید آدم

जहाँ तेरा नक्शे-कदम देखते हैं,
खियाबाँ खियाबॉं इरम देखते है।
جہاں آپ کے قدم دیکھے جاتے ہیں ،
خیابان خیابن دیکھئے ارم۔

जहाँ छोड़ा था तेरी जुस्तजू ने,
सुना है जिन्दगी अब तक वहीं है।
-रविश सिद्दकी
جہاں آپ کے دوست نے آپ کو چھوڑا ،
سنا ہے کہ زندگی ابھی باقی ہے۔
-رویش صدیقی

जहाँ दुनिया निगाहें फेर लेगी,
वहाँ ऐ दोस्त तुमको हम मिलेंगे।
-रविश सिद्दकी
جہاں دنیا نگاہ ڈالے گی ،
میں وہاں آپ سے ملوں گا
-رویش صدیقی

जाते हुए कहते हो कयामत को मिलेंगे,
क्या खूब कयामत का है गोया कोई दिन और।
-मिर्जा गालिब
جاکر ، آپ کہتے ہیں کہ آپ کو عذاب مل جائے گا ،
کتنا بڑا عذاب ، کسی اور دن۔
-مرجا غالب

जादू है या तिलिस्म है तुम्हारी जुबान में,
तुम झूठ कह रहे थे, मुझे एतिबार था।
-बेखुद देहलवी
کیا آپ کی زبان میں جادو ہے یا طلسم ،
آپ جھوٹ بول رہے تھے ، میری ایک جائداد تھی
-بخود دہلوی

जानता हूँ यह कि अर्जे-शौक है तौहीने-दिल,
फिर भी अर्जे-शौक़ पै मजबूर हो जाता हूँ मैं।
-मुनव्वर लखनवी
میں جانتا ہوں کہ آپ کا جنون دل کو تازہ کرنے والا ہے ،
تب بھی ، میں اپنے شوق کو استعمال کرنے پر مجبور ہوں۔
-منور لکھنؤ

जाना पड़ा रकीब के दर पर हजार बार,
ऐ काश! जानता न तेरी रहगुजर को मैं।
-मिर्जा गालिब
ہزار بار راکیب کے ریٹ پر جانا پڑا ،
کاش! میں تمہیں نہیں جانتا
-مرجا غالب

जाहिरा दुनिया जिसे महसूस कर सकती नहीं,
हो गई है मुझमें एक ऐसी कमी तेरे बगैर।
वो बज्म देखी है मेरी निगाह ने कि जहाँ,
बगैर शम्अ भी जलते रहते हैं परवाने।
-गुलाम मुस्तफा तबस्सुम
بظاہر دنیا محسوس نہیں کر سکتی ،
مجھے آپ کے بغیر آپ میں ایسی کمی ہے۔
میں نے وہ بز دیکھا ہے جہاں ،
یہاں تک کہ برتنیں بھی بغیر کسی پرواہ کے جلتی رہیں۔
-گلام مصطفی تبسم

जिन्दगी कहते हैं किसको, मौत किसका नाम है,
मेहरबानी आप की, नामेहरबानी आपकी।
-प्यारेलाल रशीद
کون زندگی کہتا ہے ، جس کا نام موت ہے ،
شکریہ ، شکریہ۔
-پیریل لال راشد

जिन्दगी किस तरह कटेगी ‘सैफ’,
रात कटती नजर नहीं आती।
-सैफुद्दीन सैफ
سیف کو کس طرح کاٹا جائے گا ،
رات بسر ہوتی نظر نہیں آتی۔
-سیف الدین سیف

जिन्दगी के उजाले हैं तुम से,
तुम जहाँ हो वहीं रौशनी है।
-सरवर
آپ کے ساتھ زندگی روشن ہے ،
جہاں بھی ہو ، روشنی ہے۔
-سرور

जिन्दगी नाम है जुदाई का,
आप आये तो मुझको याद आया।
-नरेश कुमार शाद
زندگی علیحدگی کا نام ہے ،
مجھے یاد آیا جب آپ تشریف لائے۔
-نریش کمار شاد

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